Saturday, September 27, 2008

एक और ब्लास्ट ... या एक और आगाज़....

एक और ब्लास्ट ... या एक और आगाज़....
डेल्ही एक फिर धमाकों से दहली एक के बाद एक धमाकों ने डेल्ही को दहला केर रख दिया हैं आज आम आदमी इन घटनायों से डरा हुआ हैं पैर मैं पूछती हु क्या यह वक्त डरने का हैं नहीं न तो फिर डरना क्या हम तो उस देश के रहने वाले हैं जिसने दुनिया मैं सायद सबसे जयादा दुःख झेला है लकिन फिर भी आज हम खरे हैं,,,, क्योंकी हम मे वो ताकत हैं जिसे कोई नहीं हिला सकता तो फिर वक्त आ गया है आम जनता के आवाज़ उठाने का ......जी हाँ.....हम तैयार हैं इस आतंकवाद के खिलाफ लारने के लिये .....सुन लो हमें डराने वालों बुजदिलो हम तैयार हैं तुमसे लारने के लिए .....तुम्हें जो करना हैं कर लो देश की एकता और अखंडता बरकरार रहेगी .....

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