Monday, September 29, 2008

रंगों के मायने .......

रंगों के मायने .......ऐसे तो हर किसी के जिन्दगी मैं रंगों के अलग अलग मायने हैं पर इलेक्ट्रॉनिक जगत मैं रंगों के क्या मायने हैं ...इसका नमूना आप हर रोज़ टीवी देखते हुये देख ही लेते होंगे ...कभी कभी टीवी पर रंगों का मेल इतना आcha होता है की लगता है की बस उससे ही देखते रहो और कभी कभी तो किसी किसी को एक मिनट भी बर्दास्त नेहं किया जा सकता जी हाँ ..... चैनल मैं रंगों का मतलब केवल होली से और रौशनी का मतलब केवल दीवाली से नहीं होता यहाँ तो हर दिन अक्सर होली और दीवाली होती है तभी तो कोई भी चैनल रंगों के मेल पर लाखों का खर्च करता है ....कुछ सेकंड के एड्ड्स मैं ही आप देखे तो लाखों का खर्च होता है जो चीख चीख कर आपने प्रोदुक्ट्स को खरीदने लिए लोगों के गुहार लगाते हैं और लोगों को वो प्रोडक्ट को खरीदने पर मजबूर केर देता है तो देखा आपने टीवी पर रंगों का कितना महत्व है ....

Saturday, September 27, 2008

एक और ब्लास्ट ... या एक और आगाज़....

एक और ब्लास्ट ... या एक और आगाज़....
डेल्ही एक फिर धमाकों से दहली एक के बाद एक धमाकों ने डेल्ही को दहला केर रख दिया हैं आज आम आदमी इन घटनायों से डरा हुआ हैं पैर मैं पूछती हु क्या यह वक्त डरने का हैं नहीं न तो फिर डरना क्या हम तो उस देश के रहने वाले हैं जिसने दुनिया मैं सायद सबसे जयादा दुःख झेला है लकिन फिर भी आज हम खरे हैं,,,, क्योंकी हम मे वो ताकत हैं जिसे कोई नहीं हिला सकता तो फिर वक्त आ गया है आम जनता के आवाज़ उठाने का ......जी हाँ.....हम तैयार हैं इस आतंकवाद के खिलाफ लारने के लिये .....सुन लो हमें डराने वालों बुजदिलो हम तैयार हैं तुमसे लारने के लिए .....तुम्हें जो करना हैं कर लो देश की एकता और अखंडता बरकरार रहेगी .....

Tuesday, September 23, 2008

बस यूँ ही .....

आज मैं ऑफिस में खाली रही ......आप सोच सकते हैं कि बिना काम ऑफिस मैं रहना कितना मुस्किल होता हैं क्या आपके साथ भी कभी ऐसा होता है अगर हाँ तो यह बताएं आप क्या करते हैं .....क्या आप भी मेरी तरह दिन भर अख़बार पढ़ते हैं या आप अपने किसी दोस्त के साथ कहीं घूमने निकल जाते हैं ....अरे मुझे तो ध्यान ही नहीं रहा सात बज चुके है और अब मेरे घर जाने का वक्त हो गया है वैसे कोई इंतज़ार तो नही कर रहा लेकिन क्या करे जाना तो है ही ......बाय एंड टेक केयर ....................

मेरा पहला ब्लॉग ......

कभी - कभी सोचती थी ...कि कुछ लिखूंगी ..पर मन कहता था कि चलो लिखने के लिए तो पूरी उम्र पड़ी है ......लेकिन जब ब्लॉग के बारे में जाना तो अपने दोस्त (जो कि पहले से ब्लॉग से जुड़ा था ) उससे एक बड़ी सी ट्रीट का वादा करके ....किसी तरह ब्लॉग कि जानकारी हासिल करके अपना ब्लॉग बनवा ही डाला .......
शुक्रिया दोस्त ......